" " Live Hindi News from Haryana, Property Investment is Better: एमबीए पास करता था 'बीए पास' से धोखाधड़ी 

Oct 30, 2013

एमबीए पास करता था 'बीए पास' से धोखाधड़ी 

बेरोजगार युवकों को नौकरी लगाने का झांसा देकर दूसरों के बैंक खातों से रुपए उड़ाने वाले गिरोह का सरगना खुद बिजनेस मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री धारी निकला। पहले भी जा चुका है जेल अपनी डिग्री का इस्तेमाल उसने ठगों का गिरोह खड़ा करने में लगाया। इससे पहले वह बैंक में भी नौकरी कर चुका है। हरिद्वार और देहरादून के बैंकों में चेक से रुपए निकालने में नाकाम रहे इस गिरोह के सदस्य बरेली में पकड़े गए हैं। गिरोह के सदस्यों को पुलिस रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है। एक अगस्त को हरिद्वार में बैंक से धोखाधड़ी से रुपए निकालने की कोशिश की गई थी। असफल रहने पर गिरोह के लोग बरेली पहुंचे और वहां 27 अगस्त को ओबीसी, बैंक बरेली से 12 लाख रुपये निकाल लिए। पहली वारदात को अंजाम देने के बाद गिरोह ने 26 अगस्त को पीएनबी से 26 लाख निकाले। मौके से भागने में कामयाब रहा लगातार दो वारदात होने पर इंटेलीजेंस, साइबर क्राइम सेल और पुलिस की संयुक्त टीम ने सेटेलाइट बस अड्डे के पास से इस गिरोह के दो सदस्यों को धर दबोचा, लेकिन गिरोह का सरगना भागने में कामयाब रहा। पुलिस की गिरफ्त में आए नरेंद्र गंगवार निवासी वरा, थाना किच्छा ऊधमसिंह नगर और धीरज सिंह निवासी रम्पुरा, कस्बा व थाना ऊधमसिंह नगर पकड़े गए। पूछताछ में पता चला कि गिरोह का सरगना वीरेंद्र साहू निवासी ओमेक्स कालोनी पंतनगर रोड, रुद्रपुर, ऊधमसिंह नगर है, जोकि मौके से भागने में कामयाब रहा। वीरेंद्र का रिकार्ड पुलिस ने खंगाला तो पता चला कि वह वर्ष 2007 में रुद्रपुर और हरिद्वार से, वर्ष 2011 में थाना खटीमा ऊधमसिंह नगर से बैंक धोखाधड़ी में जेल जा चुका है। बैंक में कर चुका नौकरी जेल में ही उसकी अन्य बदमाशों से मुलाकात हुई और उन्हें साथ लेकर उसने अपना गिरोह खड़ा कर लिया। पुलिस छानबीन में खुलासा हुआ कि गिरोह के सरगना वीरेंद्र साहू ने लखनऊ के एक प्रसिद्ध कालेज से एमबीए की है। वह आईसीआईसीआई बैंक में नौकरी भी कर चुका है। नगर कोतवाली के एसआई एमएस रावत ने बताया कि पकड़े गए आरोपियों को वारंट बी में तलब कर रिमांड पर लिया जाएगा। वहीं सरगने की तलाश में पुलिस जगह-जगह छापे मार रही है।   बैंक से ऐसे करते थे ठगी एसआई एमएस रावत ने बताया कि पकड़े गए गिरोह के सदस्य शहर के बड़े कारोबारी को निशाना बनाते थे। इसके बाद उससे फर्म के नाम से डीलिंग करते थे, जिसमें कंपनी से कोटेशन कराने के नाम पर एक हजार रुपये का चेक लेते थे। उस चेक के माध्यम से एकाउंट के बारे में जानकारी प्राप्त करते थे। सीधे मैनेजर से एकाउंट नंबर बताकर उसमें जमा धनराशि के बारे में पूछते थे।फिर एकाउंट के नाम से चेक बुक जारी करने की डिमांड लगाते थे और शिकार युवक को भेजकर मैनेजर को फोन कर उसे चैक बुक देने को कहते थे। चैक बुक प्राप्त होते ही वे फर्जी साइन से बेरोजगार युवकों को चेक भुनाने बैंक में भेजते थे। उन्हें रोजगार दिलाने के नाम पर अपने जाल में फंसाया जाता था। यदि ये बेरोजगार युवक चेक भुनाने में कामयाब रहते थे तो वे बैंक के बाहर से ही धनराशि लेकर शहर छोड़ देते थे। हरिद्वार का मामला एक अगस्त को भीमगोड़ा में रोजगार देने के लिए कार्यालय खोलकर कुछ लोगों ने भर्ती शुरू की थी, जिसमें ऋषिकेश के एक बेरोजगार युवक राहुल शर्मा को उन्होंने अपने जाल में फांसकर 12.5 लाख रुपये का चेक देकर भुगतान कराने सप्तऋषि आश्रम स्थित पीएनबी की शाखा में भेजा था। इस पर बैंक अधिकारियों को शक हुआ और उन्होंने फोन करके खाताधारक से रकम निकालने की पुष्टि की तो धोखाधड़ी का पता चला। तब पता चला कि गिरोह ने धोखाधड़ी से बैंक से चेकबुक हासिल की है।

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