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Oct 10, 2013

PM नहीं, यूपी का CM बनना चाहते हैं राहुल गांधी 

आगामी लोकसभा चुनावों के मद्देनजर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के भाषणों में हर दिन गुजरने के साथ-साथ तल्‍खी आ रही है। और कांग्रेसी यह देख-सुनकर गदगद हैं।

भाजपा के पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी के सामने कांग्रेस पार्टी की सारी उम्मीदें अपने युवराज राहुल से लगी हैं। साथ ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह समेत कई वरिष्ठ नेता इशारा कर चुके हैं कि राहुल को ही अगला पीएम बनना चाहिए।

लेकिन अगर यह कहा जाए कि एक वक्‍त था जब वह पीएम नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश का सीएम बनना चाहते थे, तो आप क्या कहेंगे?

वरिष्ठ पत्रकार और लेखक रशीद किदवई की किताब '24 अकरब रोड' के नए संस्करण में जोड़े गए अध्याय में यह खुलासा है कि कांग्रेस जिसे प्रधानमंत्री की कुर्सी पर देखना चाहती है, वही राहुल गांधी एक बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद का दावेदार बनना चाहते थे।

इस किताब में यह है कि सोनिया गांधी 2016 में सक्रिय राजनीति से रिटायर होना चाहती हैं और राहुल के पार्टी की कमान संभालने के‌ लिए हामी भरने की यह एक बड़ी वजह थी।

किदवई के मुताबिक कांग्रेसियों ने राहुल की यह पेशकश सिरे से खारिज कर दी थी। दरअसल, पार्टी के कुछ नेताओं का मानना था कि दिल्ली में उनकी सियासी ताकत का रास्ता लखनऊ से होकर जाता है, लेकिन 2012 के विधानसभा चुनाव उनके लिए बड़ा झटका साबित हुए।

राहुल इन चुनावों से पहले और दौरान कई बार कह चुके थे उत्तर प्रदेश उनकी कर्मभूमि है और वह उसकी नुमाइंदगी करने के लिए तैयार हैं।

नए अध्याय में बताया गया है कि उन्होंने नवंबर, 2011 में फूलपुर रैली के दौरान कहा था, "जब मैं उत्तर प्रदेश में इस तरह का अन्याय देखता हूं, तो सोचता हूं कि क्यों न लखनऊ आकर रहूं और आपकी लड़ाई लड़ूं।"

इसमें कहा गया है, "राहुल के करीबी सूत्रों का कहना है कि उन्होंने उत्तर प्रदेश चुनावों के दौरान मुख्यमंत्री पद का दावेदार बनने के बारे में संजीदगी से विचार किया था। लेकिन कांग्रेस कमेटी ने इस विचार को सिरे से दरकिनार कर दिया।"

उस वक्‍त राहुल को उत्तर प्रदेश में क्यों कोई पद नहीं लेना चाहिए, सहयोगियों ने इसके दो कारण बताए थे। पहला, शासन करने के‌ लिहाज से उत्तर प्रदेश काफी मुश्किल राज्य है। दूसरा, राहुल खुद को किसी एक राज्य या क्षेत्र तक सीमित नहीं रख सकते।

दलील यह थी कि राहुल अगर उत्तर प्रदेश को अपनी पहचान बनाते हैं और किसी वजह से मतदाता उन्हें खारिज करते हैं, तो इससे दिल्ली में उनकी अगुवाई में सरकार बनाने का कांग्रेस का ख्वाब जाता रहेगा।

और ऐसा हुआ भी। ‌विधानसभा चुनावों में कांग्रेस केवल 28 सीटों पर सिमटकर चौथे पायदान पर आ गई। अगर राहुल को सीएम पद का दावेदार बनाया जाता है, तो यह उनकी छवि के लिए तगड़ा झटका होता।

PM नहीं, यूपी का CM बनना चाहते हैं राहुल गांधी 

आगामी लोकसभा चुनावों के मद्देनजर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के भाषणों में हर दिन गुजरने के साथ-साथ तल्‍खी आ रही है। और कांग्रेसी यह देख-सुनकर गदगद हैं।

भाजपा के पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी के सामने कांग्रेस पार्टी की सारी उम्मीदें अपने युवराज राहुल से लगी हैं। साथ ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह समेत कई वरिष्ठ नेता इशारा कर चुके हैं कि राहुल को ही अगला पीएम बनना चाहिए।

लेकिन अगर यह कहा जाए कि एक वक्‍त था जब वह पीएम नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश का सीएम बनना चाहते थे, तो आप क्या कहेंगे?

वरिष्ठ पत्रकार और लेखक रशीद किदवई की किताब '24 अकरब रोड' के नए संस्करण में जोड़े गए अध्याय में यह खुलासा है कि कांग्रेस जिसे प्रधानमंत्री की कुर्सी पर देखना चाहती है, वही राहुल गांधी एक बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद का दावेदार बनना चाहते थे।

इस किताब में यह है कि सोनिया गांधी 2016 में सक्रिय राजनीति से रिटायर होना चाहती हैं और राहुल के पार्टी की कमान संभालने के‌ लिए हामी भरने की यह एक बड़ी वजह थी।

किदवई के मुताबिक कांग्रेसियों ने राहुल की यह पेशकश सिरे से खारिज कर दी थी। दरअसल, पार्टी के कुछ नेताओं का मानना था कि दिल्ली में उनकी सियासी ताकत का रास्ता लखनऊ से होकर जाता है, लेकिन 2012 के विधानसभा चुनाव उनके लिए बड़ा झटका साबित हुए।

राहुल इन चुनावों से पहले और दौरान कई बार कह चुके थे उत्तर प्रदेश उनकी कर्मभूमि है और वह उसकी नुमाइंदगी करने के लिए तैयार हैं।

नए अध्याय में बताया गया है कि उन्होंने नवंबर, 2011 में फूलपुर रैली के दौरान कहा था, "जब मैं उत्तर प्रदेश में इस तरह का अन्याय देखता हूं, तो सोचता हूं कि क्यों न लखनऊ आकर रहूं और आपकी लड़ाई लड़ूं।"

इसमें कहा गया है, "राहुल के करीबी सूत्रों का कहना है कि उन्होंने उत्तर प्रदेश चुनावों के दौरान मुख्यमंत्री पद का दावेदार बनने के बारे में संजीदगी से विचार किया था। लेकिन कांग्रेस कमेटी ने इस विचार को सिरे से दरकिनार कर दिया।"

उस वक्‍त राहुल को उत्तर प्रदेश में क्यों कोई पद नहीं लेना चाहिए, सहयोगियों ने इसके दो कारण बताए थे। पहला, शासन करने के‌ लिहाज से उत्तर प्रदेश काफी मुश्किल राज्य है। दूसरा, राहुल खुद को किसी एक राज्य या क्षेत्र तक सीमित नहीं रख सकते।

दलील यह थी कि राहुल अगर उत्तर प्रदेश को अपनी पहचान बनाते हैं और किसी वजह से मतदाता उन्हें खारिज करते हैं, तो इससे दिल्ली में उनकी अगुवाई में सरकार बनाने का कांग्रेस का ख्वाब जाता रहेगा।

और ऐसा हुआ भी। ‌विधानसभा चुनावों में कांग्रेस केवल 28 सीटों पर सिमटकर चौथे पायदान पर आ गई। अगर राहुल को सीएम पद का दावेदार बनाया जाता है, तो यह उनकी छवि के लिए तगड़ा झटका होता।

Sep 16, 2013

हनीमून के दौरान पड़ा छह बार द‌िल का दौरा

दिल का एक दौरा हमें दहशत में ला देता है। सोचिए 33 साल के नौजवान पर क्या गुजरी होगी जब उसे एक नहीं दिल के छह दौरे पड़े।

हुआ यूं कि ब्रिटेन में पेशे से होटल व्यवसायी एन्ड्रयू ब्रिटन की  शादी 2012 के नवंबर महीने में हुई।

एन्ड्रयू ने अपनी नई नवेली दुल्हन लॉरेन के साथ मालदीव में हनीमून मनाने की योजना बनाई। हनीमून पर जाते समय वे एकदम तंदुरुस्त थे। मगर मालदीव पहुंचने के एक घंटे के भीतर ही वे कुछ असहज महसूस करने लगे।

एन्ड्रयू को वहां दिल के छह दौरे आए। दम घोंट देने, मरणासन्न कर देने वाले दिल के छह-छह दौरे।

एन्ड्रयू ब्रिटन बताते हैं कि हनीमून पर जाते समय सब कुछ ठीक था। 

उन्होंने बताया, "मैं एक स्क्वैश खिलाड़ी हूं और हमेशा ट्रेनिंग पर भी जाता रहता हूं। इसलिए तन-मन से हमेशा फिट रहता हूं।"

ब्रिटन की तबीयत हवाई जहाज में ही खराब होनी शुरू हो गई थी। पहले उन्हें लगा कि ये मामूली सर्दी है। फूड प्वॉयजनिंग की भी आशंका हो रही थी।

मालदीव में एन्ड्रयू होटल के कमरे में ही बने रहे। वे खुद को काफी कमजोर महसूस कर रहे थे।

पत्नी लॉरेन ने बताया, "सच कहूं तो शुरू-शुरू में मैंने एन्ड्रयू की ढीली तबीयत को गंभीरता से नहीं लिया। मुझे लगा कि सफर का असर होगा।"

लॉरेन बताती हैं, "तब आधी रात थी। एन्ड्रयू मेरे पास आए और कहने लगे कि वे सांस नहीं ले पा रहे। उनकी छाती में भी दर्द हो रहा था। मैं डर गई। तुरंत घंटी बजाई और अस्पताल जाने के लिए स्ट्रेचर मंगवाया।"

एन्ड्रयू पसीने से तर-ब-तर हो रहे थे। वे बताते हैं, "मैं हांफ रहा था। बेहोशी जैसी छा रही थी। सांसें छूट रहीं थीं।"

वे जब अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टरों ने पहले बताया कि उन्हें स्वाईन फ्लू हुआ है। उनकी तबीयत बिगड़ती ही चली गई। उन्हें इन्क्यूबेटर और दूसरे लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया।

लॉरेन ने बताया, "एन्ड्रयू के बेड का पर्दा खींच दिया गया। अलार्म बजने लगे। अचानक छह-सात डॉक्टर उनके बेड की तरफ दौड़े। वे सब चिल्ला रहे थे। मैं पर्दे के बाहर बैठी घबराहट से कांप रही थी।"

तभी एक डॉक्टर ने लॉरेन को आकर बताया कि एन्ड्रयू को दिल का दौरा पड़ा है। इसके बाद उन्हें आईसीयू में रखा गया।

एन्ड्रयू के दिल ने काम करना लगभग बंद कर दिया था। इलाज के बाद उनकी तबीयत कुछ स्थिर हुई।
मगर अगली ही सुबह एन्ड्रयू को दिल का दूसरा दौरा पड़ा।

लॉरेन बताती हैं,"मैं सुबह-सुबह एन्ड्रयू से मिलने गई थी। बात करते-करते अचानक उनकी आंखें उलटने लगीं। मैंने अलार्म बजाया।"

अगले दिन लॉरेन को बताया गया कि एन्ड्रयू को यदि एक दिन में किसी अच्छे अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया तो उनकी जान को खतरा हो सकता है।

फिर उन्हें बैंकॉक लाया गया। वहां वे दो हफ्ते रहे। इस दौरान वे लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रहते थे। बोलना मुश्किल था इसलिए कागज और कलम संवाद का जरिया बने। एक दिन एन्ड्रयू ने कागज पर लिख कर पूछा, "क्या मैं मरने वाला हूं?"

तब तक एन्ड्रयू को दिल के छह दौरे पड़ चुके थे। एन्ड्रयू कहते हैं, "मैं कागज पर छह बार मर चुका था।"

एन्ड्रयू कहते हैं, "मुझे बताया गया कि मेरी इस गंभीर हालत की वजह कोई वायरस है। शायद कोई आम वायरस, या फ्लू वायरस। मेरा शरीर उससे लड़ नहीं पा रहा। इसका असर दिल पर हो रहा है।"

एन्ड्रयू की दिल की बीमारी ठीक करने के लिए उनके दिल के दो ऑपरेशन हुए।

वे कहते हैं, "मैं खुश हूं कि मैं अपनी बीमारी से लड़ा और जिंदगी में वापसी की। शरीर की सारी गतिविधियां सामान्य हैं। मैं चाहता हूं, हम जल्दी अपने घर जाएं।"

फिलहाल एन्ड्रयू को किसी अच्छे 'हार्ट डोनर' का इंतजार है। तब से अब तक नौ महीने गुजर चुके हैं। वे ब्रिटेन के अस्पताल के वार्ड में दिल के प्रत्यारोपित किए जाने का इंतजार कर रहे हैं।

Aug 30, 2013

गूगल बनाएगी टैक्सी, ड्राइवर के बिना चलेगी CLICK FOR MORE Live Hindi News from Haryana, Property Investment

Live Hindi News from Haryana, Property Investmentऐसा लगता है कि हॉलीवुड फिल्मों की तरह हकीकत में एक दौर ऐसा आएगा, जब इंसानों का हर काम रोबोट करते नजर आएंगे। तकनीक की दुनिया में इस दिशा में हर रोज नई क्रांति हो रही है।

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दिग्गज कंपनी गूगल हर क्षेत्र में तकनीक का इस्तेमाल करने में माहिर है। इसी सिलसिले में गूगल सॉफ्टवेयर के साथ-साथ नई हार्डवेयर तकनीक का भी इस्तेमाल कर रही है। कंपनी ने हाल ही में एक रोबो-टैक्सी बनाने की तैयारी की है।

इस कार को चलाने के लिए किसी ड्राइवर की जरूरत नहीं होगी। यह रोबो-टैक्सी लोगों की मांग पर खुद ही उन्हें लाने और ले जाने की सुविधा देने के लिए हाजिर हो जाएगी।

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‘द टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी के अधिकारियों का मानना है कि यह दुनिया भर की परिवहन व्यवस्था बदल सकती है।

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ज्यादातर लोगों को कार खरीदने की जरूरत ही महसूस नहीं होगी। उनकी मानें तो यह सड़क हादसों में भी कमी लाएगी। साथ ही पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद साबित होगी।

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गूगल ने हाल ही में बड़े कार निर्माताओं के साथ बातचीत के बाद यह रोबो-टैक्सी बनाने का फैसला लिया है। कंपनी को उम्मीद है कि कार निर्माता उनके ‘सेल्फ-ड्राइविंग सॉफ्टवेयर’ का इस्तेमाल कर इस प्रोजेक्ट को सफलतापूर्वक पूरा करेंगे।
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