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Sep 30, 2013

साइलेंट मोड में हैं प्रधानमंत्रीः राजनाथ

बीजेपी प्रमुख राजनाथ सिंह ने कहा है आजादी के बाद देश की अर्थव्यवस्था सबसे बुरे दौर से गुजर रही है।

ऐसे में देश को एक यथार्थवादी प्रधानंत्री की जरूरत है। उसे ‌मनमो‌हन सिंह की तरह किसी अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री की जरूरत नहीं है।

कोलकाता में आईसीसी और एमसीसी चैंबर की ओर से आयोजित एक संवाद सत्र में राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री साइलेंट मोड में हैं। उनकी भंगिमा ऐसी है जैसे कोई सोच रहा हो। मनमोहन बहुत बड़े अर्थशास्त्री हैं।

अटल बिहारी वाजपेयी अर्थशास्त्री नहीं थे लेकिन उन्हें देश की वास्तविकता का पता था। आप एनडीए और यूपीए के शासन के दौरान इकोनॉमी के हालात की तुलना कर लीजिए।

2004 में यूपीए के सत्ता में आने के बाद रुपया वेंटिलेटर में चला गया, जबकि डॉलर लगातार बढ़ रहा है। निवेशक, विदेश में निवेश के लिए दौड़ रहे हैं। देश का शिक्षित नौजवान बाहर जा रहा है।

राजनाथ सिंह ने यह गौर किया कि 1998 से 2004 के बीच भारत चालू खाते के आधिक्य का देश था। लेकिन यह आधिक्य यूपीए के शासनकाल में घाटे में तब्दील हो गया।

उन्होंने यूपीए सरकार के दौरान बने ऊंचे विदेशी ऋण और चालू खाते के घाटे के खतरनाक गठजोड़ की ओर इशारा किया।

उन्होंने कहा कि अब यह समस्या काबू से बाहर हो चुकी है। लिहाजा भारत को अपनी आर्थिक नीतियों को बदलने की जरूरत है।

बीजेपी ने दोनों सदनों में सरकार से चालू खाते के घाटे को काबू करने के कदम उठाने को कहा लेकिन उसने कुछ नहीं किया। उन्होंने कहा कि यह सब सरकार की गलत योजनाओं और बेकाबू भ्रष्टाचार से हुआ है।