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Sep 16, 2013

हनीमून के दौरान पड़ा छह बार द‌िल का दौरा

दिल का एक दौरा हमें दहशत में ला देता है। सोचिए 33 साल के नौजवान पर क्या गुजरी होगी जब उसे एक नहीं दिल के छह दौरे पड़े।

हुआ यूं कि ब्रिटेन में पेशे से होटल व्यवसायी एन्ड्रयू ब्रिटन की  शादी 2012 के नवंबर महीने में हुई।

एन्ड्रयू ने अपनी नई नवेली दुल्हन लॉरेन के साथ मालदीव में हनीमून मनाने की योजना बनाई। हनीमून पर जाते समय वे एकदम तंदुरुस्त थे। मगर मालदीव पहुंचने के एक घंटे के भीतर ही वे कुछ असहज महसूस करने लगे।

एन्ड्रयू को वहां दिल के छह दौरे आए। दम घोंट देने, मरणासन्न कर देने वाले दिल के छह-छह दौरे।

एन्ड्रयू ब्रिटन बताते हैं कि हनीमून पर जाते समय सब कुछ ठीक था। 

उन्होंने बताया, "मैं एक स्क्वैश खिलाड़ी हूं और हमेशा ट्रेनिंग पर भी जाता रहता हूं। इसलिए तन-मन से हमेशा फिट रहता हूं।"

ब्रिटन की तबीयत हवाई जहाज में ही खराब होनी शुरू हो गई थी। पहले उन्हें लगा कि ये मामूली सर्दी है। फूड प्वॉयजनिंग की भी आशंका हो रही थी।

मालदीव में एन्ड्रयू होटल के कमरे में ही बने रहे। वे खुद को काफी कमजोर महसूस कर रहे थे।

पत्नी लॉरेन ने बताया, "सच कहूं तो शुरू-शुरू में मैंने एन्ड्रयू की ढीली तबीयत को गंभीरता से नहीं लिया। मुझे लगा कि सफर का असर होगा।"

लॉरेन बताती हैं, "तब आधी रात थी। एन्ड्रयू मेरे पास आए और कहने लगे कि वे सांस नहीं ले पा रहे। उनकी छाती में भी दर्द हो रहा था। मैं डर गई। तुरंत घंटी बजाई और अस्पताल जाने के लिए स्ट्रेचर मंगवाया।"

एन्ड्रयू पसीने से तर-ब-तर हो रहे थे। वे बताते हैं, "मैं हांफ रहा था। बेहोशी जैसी छा रही थी। सांसें छूट रहीं थीं।"

वे जब अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टरों ने पहले बताया कि उन्हें स्वाईन फ्लू हुआ है। उनकी तबीयत बिगड़ती ही चली गई। उन्हें इन्क्यूबेटर और दूसरे लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया।

लॉरेन ने बताया, "एन्ड्रयू के बेड का पर्दा खींच दिया गया। अलार्म बजने लगे। अचानक छह-सात डॉक्टर उनके बेड की तरफ दौड़े। वे सब चिल्ला रहे थे। मैं पर्दे के बाहर बैठी घबराहट से कांप रही थी।"

तभी एक डॉक्टर ने लॉरेन को आकर बताया कि एन्ड्रयू को दिल का दौरा पड़ा है। इसके बाद उन्हें आईसीयू में रखा गया।

एन्ड्रयू के दिल ने काम करना लगभग बंद कर दिया था। इलाज के बाद उनकी तबीयत कुछ स्थिर हुई।
मगर अगली ही सुबह एन्ड्रयू को दिल का दूसरा दौरा पड़ा।

लॉरेन बताती हैं,"मैं सुबह-सुबह एन्ड्रयू से मिलने गई थी। बात करते-करते अचानक उनकी आंखें उलटने लगीं। मैंने अलार्म बजाया।"

अगले दिन लॉरेन को बताया गया कि एन्ड्रयू को यदि एक दिन में किसी अच्छे अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया तो उनकी जान को खतरा हो सकता है।

फिर उन्हें बैंकॉक लाया गया। वहां वे दो हफ्ते रहे। इस दौरान वे लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रहते थे। बोलना मुश्किल था इसलिए कागज और कलम संवाद का जरिया बने। एक दिन एन्ड्रयू ने कागज पर लिख कर पूछा, "क्या मैं मरने वाला हूं?"

तब तक एन्ड्रयू को दिल के छह दौरे पड़ चुके थे। एन्ड्रयू कहते हैं, "मैं कागज पर छह बार मर चुका था।"

एन्ड्रयू कहते हैं, "मुझे बताया गया कि मेरी इस गंभीर हालत की वजह कोई वायरस है। शायद कोई आम वायरस, या फ्लू वायरस। मेरा शरीर उससे लड़ नहीं पा रहा। इसका असर दिल पर हो रहा है।"

एन्ड्रयू की दिल की बीमारी ठीक करने के लिए उनके दिल के दो ऑपरेशन हुए।

वे कहते हैं, "मैं खुश हूं कि मैं अपनी बीमारी से लड़ा और जिंदगी में वापसी की। शरीर की सारी गतिविधियां सामान्य हैं। मैं चाहता हूं, हम जल्दी अपने घर जाएं।"

फिलहाल एन्ड्रयू को किसी अच्छे 'हार्ट डोनर' का इंतजार है। तब से अब तक नौ महीने गुजर चुके हैं। वे ब्रिटेन के अस्पताल के वार्ड में दिल के प्रत्यारोपित किए जाने का इंतजार कर रहे हैं।

Jul 31, 2013

भारतीय डॉक्टरों ने अफ्रीकी कैंसर मरीज को बचाया

 Rohtak News Live
कैंसर के एक दुर्लभ मामले से जूझ रहे कांगो के 22 वर्षीय नोसी को गुड़गांव के एक अस्पताल में नयी जिंदगी मिली है.
आंख को छोड़कर उनके चेहरे का बड़ा हिस्सा कैंसर से प्रभावित था और बचने की दर केवल 10 फीसदी थी.

नोसी के मुंह, ओंठ, गाल, जबड़े की हड्डी और जीभ का 90 फीसदी हिस्सा कैंसर से प्रभावित था और पिछले चार साल से न तो वह खा पा रहा था और न ही बोल पाता था.

गुड़गांव स्थित पारस अस्पताल में ऑपरेशन करने वाले सर्जनों की टीम की अगुवाई करने वाले राकेश दुरखुरे ने कहा, ‘‘दुनिया में अपनी तरह का यह छठा मामला है. पांच महीने पहले जब नोसी ने संपर्क किया तो उसकी स्थिति दहला देनेवाली थी. हर जगह अपने बेटे के इलाज के बारे में मनाही के बाद उसकी मां सारी उम्मीदें छोड़ चुकी थी.’’

डॉक्टर ने कहा, ‘‘यह युवक चार साल से न तो बोलने में सक्षम था, न खा पाता था न चबा पाता था. ड्राप से किसी तरह उसकी मां उसे आहार देती थी.’’

मौत का जोखिम जुड़ा होने के कारण भारत और विदेश के कई अस्पतालों ने उसका इलाज करने से मना कर दिया था. दुरखुरे ने तीन चरण में सर्जरी की और अंतिम सर्जरी के लिए कुल छह महीने का समय लगेगा.

डॉक्टर ने कहा, ‘‘हमने उसकी सर्जरी तीन चरण में की और आखिरकार उसकी आवाज लौटाने में सफल रहे. अब छह महीने के बाद सर्जरी की जाएगी.’’

ऑपरेशन के पहले चरण में कैंसर के खतरे को कम करने के लिए चार सत्र में कीमोथेरेपी की गयी. सन के लिए नाक के सामने के छेदों को भरा गया और संक्रमण रोकने के लिए एंटीबायोटिक्स की भारी मात्रा दी गयी.


उन्होंने कहा, ‘‘दूसरे चरण में हमने गाल, ऊपरी जबड़ा, निचले जबड़े की हड्डी और आधी जीभ को हटाया. हमारी टीम ने दो परतों- मुंह की त्वचा के लिए छाती की त्वचा और चेहरे के लिए जांघ की त्वचा का इस्तेमाल किया. अगली सर्जरी छह महीने के बाद की जाएगी जब उसके मुंह और ओंठ को हटाया जाएगा.’’

चार वर्षों में पहली बार पिछले सप्ताह नोसी के दांतों की सफाई हुयी. डॉक्टर ने कहा, ‘‘वह भावुक हो गया और रोने लगा.’’ अब बोलने में सक्षम हो चुके नोसी एक नयी जिंदगी की आशा के साथ अगले सप्ताह अपने देश जाएंगे और अगली सर्जरी के लिए फिर आएंगे.