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Dec 13, 2013

अब हर तरफ रहेगी पुलिस नजर

रोहतक। अब पीसीआर और राइडर पर तैनात पुलिसकर्मी स्कूल, कॉलेज, पार्क और बैंक सहित शिक्षण संस्थानों के बाहर मुस्तैदी से नजर आएंगे। इसके लिए पुलिस अधीक्षक ने दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके अलावा शाम के समय भीड़-भाड़ वाले स्थानाें और सार्वजनिक स्थलों पर भी तैनाती रहेगी। सुबह के समय पार्कों के बाहर राइडर और पीसीआर की तैनात की गई है। इसके बाद बैंक, शिक्षण संस्थान और बाजार में तैनात होगी। पुलिस अधीक्षक राजेश दुग्गल ने निर्देश दिए हैं कि घटना की सूचना मिलते ही राइडर और पीसीआर तुरंत मौके पर पहुंचे और पुलिस मुख्यालय को मामले से अवगत कराए। पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि जिले में मौजूदा समय में 45 राइडर और 18 पीसीआर हैं। इनके प्वांइट निर्धारित हैं। इसके अलावा महिला पीसीआर और राइडर की अलग से तैनात की गई है। महिला पीसीआर व राइडर की तैनाती के बाद से ही शिक्षण संस्थानों और अन्य स्थानों पर छेड़छाड़ की घटनाओं पर पूरी तरह से काबू पाया गया है।

Nov 30, 2013

हत्या कर शव खेत में जलाया

रोहतक। गांव ककराना में वीरवार रात अज्ञात हमलावरों ने एक युवक की हत्या कर शव को खुर्द बुर्द करने की नीयत से जलाने का प्रयास किया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को अपने कब्जे में ले लिया। शव जला होने के कारण उसकी शिनाख्त नहीं हो सकी। पुलिस ने शव को पीजीआई के शव गृह में रखवा दिया है और इस संबंध में अज्ञात हमलावरों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। एफएसएल की विशेष टीम ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस के अनुसार शुक्रवार सुबह खेतों में जाते वक्त ग्रामीणों ने एक युवक का शव पड़ा हुआ देखा। इसी बीच सूचना मिलने पर कलानौर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को अपने कब्जे में ले लिया। पुलिस ने घटनास्थल का बारीकी से मुआयना किया, परंतु इस संबंध में पुलिस को कोई जानकारी नहीं मिली। मृतक का चहेरा झुलसा होने के कारण उसकी पहचान नहीं हो सकी। पुलिस का कहना है कि हो सकता है कि युवक की हत्या किसी और स्थान पर की गई हो और शव को खुर्द-बुर्द करने की नीयत से यहां जलाया गया हो। कलानौर थाना प्रभारी नरेंद्र कुमार ने बताया कि शव की शिनाख्त के लिए आसपास के लेागों से पता किया जा रहा है।

Oct 11, 2013

यह कैसी सेना? आपस में भिड़े जवान और अफसर 

सैनिकों के बीच आपसी झगड़े की खबर कम ही सामने आती हैं, लेकिन सैन्य इकाई में सैनिकों और अधिकारियों के बीच झड़प की एक और घटना से पर्दा उठा है।

उत्तर प्रदेश के मेरठ में 10 सिख लाइट इनफैंट्री बटालियन में बीती रात लड़ाई हो गई, जिसमें तीन लोग जख्मी हुए। इनमें से एक लेफ्टिनेंट कर्नल है, जो सेकेंड इन कमांड था।

अभी तक यह साफ नहीं हुआ कि लड़ाई की वजह क्या थी और यह कितनी बड़ी थी, लेकिन सूत्रों का कहना है कि झगड़ा कल हुआ और कई लोगों को इलाज की जरूरत पड़ी। इनमें से कुछ अस्पताल में भी भर्ती कराए गए हैं।

हालिया वर्षों में इस तरह की यह चौथी घटना है। पिछले दो साल में दो आर्टिलरी इकाई औरा दो आर्मर्ड यूनिट में इसी तरह क झगड़ा हो चुका है।

हालांकि, यह पहली बार है कि किसी इनफैंट्री यूनिट में जवानों और अधिकारियों के बीच इस तरह का लड़ाई-झगड़ा हुआ हो।

सैन्य सूत्रों ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि इससे जुड़ा बयान जल्द ही जारी कर दिया जाएगा। सेना ने इस मामले के आदेश भी दिए हैं।

Oct 10, 2013

PM नहीं, यूपी का CM बनना चाहते हैं राहुल गांधी 

आगामी लोकसभा चुनावों के मद्देनजर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के भाषणों में हर दिन गुजरने के साथ-साथ तल्‍खी आ रही है। और कांग्रेसी यह देख-सुनकर गदगद हैं।

भाजपा के पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी के सामने कांग्रेस पार्टी की सारी उम्मीदें अपने युवराज राहुल से लगी हैं। साथ ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह समेत कई वरिष्ठ नेता इशारा कर चुके हैं कि राहुल को ही अगला पीएम बनना चाहिए।

लेकिन अगर यह कहा जाए कि एक वक्‍त था जब वह पीएम नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश का सीएम बनना चाहते थे, तो आप क्या कहेंगे?

वरिष्ठ पत्रकार और लेखक रशीद किदवई की किताब '24 अकरब रोड' के नए संस्करण में जोड़े गए अध्याय में यह खुलासा है कि कांग्रेस जिसे प्रधानमंत्री की कुर्सी पर देखना चाहती है, वही राहुल गांधी एक बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद का दावेदार बनना चाहते थे।

इस किताब में यह है कि सोनिया गांधी 2016 में सक्रिय राजनीति से रिटायर होना चाहती हैं और राहुल के पार्टी की कमान संभालने के‌ लिए हामी भरने की यह एक बड़ी वजह थी।

किदवई के मुताबिक कांग्रेसियों ने राहुल की यह पेशकश सिरे से खारिज कर दी थी। दरअसल, पार्टी के कुछ नेताओं का मानना था कि दिल्ली में उनकी सियासी ताकत का रास्ता लखनऊ से होकर जाता है, लेकिन 2012 के विधानसभा चुनाव उनके लिए बड़ा झटका साबित हुए।

राहुल इन चुनावों से पहले और दौरान कई बार कह चुके थे उत्तर प्रदेश उनकी कर्मभूमि है और वह उसकी नुमाइंदगी करने के लिए तैयार हैं।

नए अध्याय में बताया गया है कि उन्होंने नवंबर, 2011 में फूलपुर रैली के दौरान कहा था, "जब मैं उत्तर प्रदेश में इस तरह का अन्याय देखता हूं, तो सोचता हूं कि क्यों न लखनऊ आकर रहूं और आपकी लड़ाई लड़ूं।"

इसमें कहा गया है, "राहुल के करीबी सूत्रों का कहना है कि उन्होंने उत्तर प्रदेश चुनावों के दौरान मुख्यमंत्री पद का दावेदार बनने के बारे में संजीदगी से विचार किया था। लेकिन कांग्रेस कमेटी ने इस विचार को सिरे से दरकिनार कर दिया।"

उस वक्‍त राहुल को उत्तर प्रदेश में क्यों कोई पद नहीं लेना चाहिए, सहयोगियों ने इसके दो कारण बताए थे। पहला, शासन करने के‌ लिहाज से उत्तर प्रदेश काफी मुश्किल राज्य है। दूसरा, राहुल खुद को किसी एक राज्य या क्षेत्र तक सीमित नहीं रख सकते।

दलील यह थी कि राहुल अगर उत्तर प्रदेश को अपनी पहचान बनाते हैं और किसी वजह से मतदाता उन्हें खारिज करते हैं, तो इससे दिल्ली में उनकी अगुवाई में सरकार बनाने का कांग्रेस का ख्वाब जाता रहेगा।

और ऐसा हुआ भी। ‌विधानसभा चुनावों में कांग्रेस केवल 28 सीटों पर सिमटकर चौथे पायदान पर आ गई। अगर राहुल को सीएम पद का दावेदार बनाया जाता है, तो यह उनकी छवि के लिए तगड़ा झटका होता।

PM नहीं, यूपी का CM बनना चाहते हैं राहुल गांधी 

आगामी लोकसभा चुनावों के मद्देनजर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के भाषणों में हर दिन गुजरने के साथ-साथ तल्‍खी आ रही है। और कांग्रेसी यह देख-सुनकर गदगद हैं।

भाजपा के पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी के सामने कांग्रेस पार्टी की सारी उम्मीदें अपने युवराज राहुल से लगी हैं। साथ ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह समेत कई वरिष्ठ नेता इशारा कर चुके हैं कि राहुल को ही अगला पीएम बनना चाहिए।

लेकिन अगर यह कहा जाए कि एक वक्‍त था जब वह पीएम नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश का सीएम बनना चाहते थे, तो आप क्या कहेंगे?

वरिष्ठ पत्रकार और लेखक रशीद किदवई की किताब '24 अकरब रोड' के नए संस्करण में जोड़े गए अध्याय में यह खुलासा है कि कांग्रेस जिसे प्रधानमंत्री की कुर्सी पर देखना चाहती है, वही राहुल गांधी एक बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद का दावेदार बनना चाहते थे।

इस किताब में यह है कि सोनिया गांधी 2016 में सक्रिय राजनीति से रिटायर होना चाहती हैं और राहुल के पार्टी की कमान संभालने के‌ लिए हामी भरने की यह एक बड़ी वजह थी।

किदवई के मुताबिक कांग्रेसियों ने राहुल की यह पेशकश सिरे से खारिज कर दी थी। दरअसल, पार्टी के कुछ नेताओं का मानना था कि दिल्ली में उनकी सियासी ताकत का रास्ता लखनऊ से होकर जाता है, लेकिन 2012 के विधानसभा चुनाव उनके लिए बड़ा झटका साबित हुए।

राहुल इन चुनावों से पहले और दौरान कई बार कह चुके थे उत्तर प्रदेश उनकी कर्मभूमि है और वह उसकी नुमाइंदगी करने के लिए तैयार हैं।

नए अध्याय में बताया गया है कि उन्होंने नवंबर, 2011 में फूलपुर रैली के दौरान कहा था, "जब मैं उत्तर प्रदेश में इस तरह का अन्याय देखता हूं, तो सोचता हूं कि क्यों न लखनऊ आकर रहूं और आपकी लड़ाई लड़ूं।"

इसमें कहा गया है, "राहुल के करीबी सूत्रों का कहना है कि उन्होंने उत्तर प्रदेश चुनावों के दौरान मुख्यमंत्री पद का दावेदार बनने के बारे में संजीदगी से विचार किया था। लेकिन कांग्रेस कमेटी ने इस विचार को सिरे से दरकिनार कर दिया।"

उस वक्‍त राहुल को उत्तर प्रदेश में क्यों कोई पद नहीं लेना चाहिए, सहयोगियों ने इसके दो कारण बताए थे। पहला, शासन करने के‌ लिहाज से उत्तर प्रदेश काफी मुश्किल राज्य है। दूसरा, राहुल खुद को किसी एक राज्य या क्षेत्र तक सीमित नहीं रख सकते।

दलील यह थी कि राहुल अगर उत्तर प्रदेश को अपनी पहचान बनाते हैं और किसी वजह से मतदाता उन्हें खारिज करते हैं, तो इससे दिल्ली में उनकी अगुवाई में सरकार बनाने का कांग्रेस का ख्वाब जाता रहेगा।

और ऐसा हुआ भी। ‌विधानसभा चुनावों में कांग्रेस केवल 28 सीटों पर सिमटकर चौथे पायदान पर आ गई। अगर राहुल को सीएम पद का दावेदार बनाया जाता है, तो यह उनकी छवि के लिए तगड़ा झटका होता।

एक दिमाग, दो सिर, चार आंख, दो नाक, कौन है ये?

एक दिमाग, दो नाक और चार आंखें। सुनने में ये कोई अजीबोगरीब जानवर मालूम पड़ रहा होगा लेकिन ये कोई अजीबोगरीब जानवर नहीं बल्कि एक ब‌छिया है।

डेली मेल की खबर के अनुसार, वर्मोंट के एक फार्म में जन्मी ये बछिया दो सिर वाला है। दिलचस्प बात ये है कि जहां अमूमन दो सिर वाले या किसी भी विकृति के साथ जन्मे बच्चे कुछ ही घंटे बाद मर जाते हैं, ये बछिया जिंदा है और स्वस्‍थ है।

पशु विशेषज्ञों का मानना है कि दरअसल ये दो बच्चे रहे होंगे लेकिन गर्भाशय में अंडे सही से अलग नहीं हो पाए और ये बछिया दो सिर के साथ पैदा हो गई

हालांकि फार्म के मालिक ‌किस्टेन क्वेसनेल ने अभी तक इसका कोई नाम नहीं रखा है लेकिन वो इस अनोखी बछिया के पैदा होने से काफी खुश हैं।

क्वेसनेल बताते हैं कि इस बछिया का सिर एक ही है। ऐसे में एक मुंह से अगर उसे दूध पिलाया जाता है तो दूसरा मुंह भी वैसी ही हरकत करता है। ये बछिया दोनो मुंह से खने में सक्षम है।

इससे पहले इस साल की शुरुआत में न्यूजीलैंड में एक किसान के घर  आठ पैर, चार आंख, दो शरीर और एक सिर वाला बछड़ा पैदा हुआ था।
जॉर्जिया में साल 2011 में दो सिर वाला बछड़ा पैदा हुआ था।

Sep 18, 2013

अब स्मार्टफोन्स पर भी नमो का जलवा 

आप भी नरेंद्र मोदी के फैन हैं तो आप अपने एंड्रॉयड स्मार्टफोन पर नमो पॉकेट बुक ऐप्लीकेशन डाउनलोड कर सकते हैं।

इस पॉकेटबुक मोबाइल ऐप्लीकेशन के जरिए आप नरेंद्र मोदी के भाषण, मोदी की सामाजिक मुद्दों पर विचार, आम आदमी को लेकर उनकी सोच और उनके विकास के बारे में सारी जानकारियां मिलेंगी।

नरेंद्र मोदी वर्तमान समय में भारत के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से एक हैं। पोल और सर्वे के मुताबिक बड़ी संख्या में लोग उन्हें भारत के अगले प्रधानमंत्री के तौर पर देखना चाहते हैं।

इस पॉकेट बुक के माध्यम से नरेंद्र मोदी के गुजरात में क‌िए विकास कार्य और उनके एजेंडे के बारे में भी बताएगी। 

बस आप अपने मोबाइल फोन को शेक करें और मोदी के शिक्षा, नारी शक्त‌ि, विकास और उनकी उपलब्ध‌ि से संबंधित भाषण को सुन सकते हैं।

आगामी लोकसभा चुनावों में युवाओं तक अपनी पकड़ बनाने के ल‌िए ये एक कारगर कदम है। 2014 चुनाव के लिए युवाओं को तैयार और जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इस ऐप को एंड्रॉयड के साथ साथ आईओएस पर भी डाउनलोड किया जा सकता है।

छह भाषणों का संग्रह

नरेंद्र मोदी से संबंधित इस मोबाइल ऐप्लीकेशन में उनके छह भाषणों का संग्रह है, जो उनकी विकास यात्रा और उपलब्धियों के बारे में बताती हैं।

ये सारे भाषण उनके अलग अलग विषयों पर उनकी सोच और समाधान के बारे में बताते हैं।

मोबाइल स्मार्टफोन और ऐप्लीकेशन की दुन‌‌िया में वस‌ुंधरा राजे और अशोक गहलोत की भी ऐप्लीकेशन मौजूद हैं। आगामी राजस्थान ‌व‌िधानसभा चुनावों में युवाओं तक अपनी पहुंच बनाने के ल‌िए ये ऐप्लीकेशन बनाई गईं हैं।

अशोक गहलोत की ऐप्लीकेशन सरकार के आगामी कार्यक्रम, व‌िकास कार्य, खबरें और योजनाओं की जानकारी देती है। वहीं वसुंधरा राजे की बायोग्राफी, भाषण, उनकी उपलब्ध‌ियां, ब्लॉग आद‌ि से जुड़ा जा सकता है।

और भी हैं ऐप्लीकेशन

नरेंद्र मोदी से जुड़ी ये कोई पहली मोबाइल ऐप्लीकेशन नहीं है। इसके अलावा और भी नरेंद्र मोदी से जुड़ी ऐप्लीकेशन गूगल और आईओएस पर मौजूद हैं। 

सुपर नमो और नमो लॉयन भी नरेंद्र मोदी से संबंध‌ित ऐप है। ये दोनों मोबाइल गेम हैं।

यहां से करें ऐप्लीकेशन डाउनलोड- http://tiny.cc/z58l3w

चमगादड़ पहुंची अस्पताल, नर्सों ने कराई डिलीवरी

अमूमन चमगाद़ड़ के बारे में लोग सुनना या जानना कम ही पसंद करते हैं। उनके लिए चमगादड़ एक ऐसा स्तनधारी है जो अंधेरे में रहता है और उल्टा लटका र‌हता है। लेकिन ये कहानी थोड़ी अलग है।

क्रेजीन्यूज 24 की खबर के अनुसार, ये एक मादा चमगादड़ की दुखभरी कहानी है। जिसे एक पिस्सू ने काट लिया और उसकी वजह से वो अपंग हो गई।

हालांकि अपंग होने के बाद इस मादा को अस्पताल ले जाया गया। ऑस्ट्रेलिया के टोल्गा बैट अस्पताल में डॉक्टरों ने इलाज के दौरान पाया कि ये मादा चमगादड़ काफी कमजोर हो चुकी है और किसी भी वक्त मर सकती है।

एक ओर जहां मादा काफी कमजोर थी वहीं अस्पताल की नर्सों को जांच के दौरान पता चला कि वो गर्भवती भी है। उसके दर्द का एक कारण ये भी था कि उसे प्रसव पीड़ा हो रही थी। ऐसे में वहां मौजूद नर्सों ने सोचा कि वो प्रेगनेंसी में उसकी मदद करेंगी।

उन्होंने डिलीवरी तो करा दी लेकिन अपंग हो जाने की वजह से बच्‍चे को जन्म देने के बाद ही वो मर गई। मरने से पहले थोड़ी देर के लिए ही सही उसने अपने बच्चे को प्यार जरूर कर लिया। 

ये है दुनिया की सबसे ग्लैमरस दादी, पहनती है माइक्रोमिनी

अमूमन समझा जाता है कि ग्लैमरस केवल कमसिन, जवान लड़कियां ही दिख सकती हैं। लेकिन आप गलत है क्योंकि हम आपको दुनिया की सबसे ग्लैमरस दादी से मिलवाने जा रहे हैं।

डेली मेल की खबर के अनुसार, 75 साल की ये दादी मिनीस्कर्ट पहनती है, माइक्रो मिनी पहनती है और तो और हर वो ड्रेस पहनती है जिन्हें पहनकर मॉडल्स रैंप पर चलती हैं।

चैनल 4 की फिल्म फैब्युलस ‌फशनिस्टा ने छह ऐसे बुजुर्गों को सामने लाने का काम किया है जो आज अपने लुक की वजह से चर्चा में हैं। जीन वुड्स नाम की इस महिला ने अपने बाल भी काफी ट्रेंडी स्टाइल में कटवा रखे हैं। जीन के अलावा इस फिल्म में पांच और बुजुर्गों को भी इस फिल्म का हिस्सा बनाया है।
देखिए दादी की कुछ मोहक तस्वीरें:

अजीब कपड़े पहन मंदिर पंहुच गईं विद्या बालन

अभिनेत्री विद्या बालन मुंबई के सिद्विविनायक मंदिर पंहुची तो लोगों की निगाहें उन पर टिक गईं। लोग उनसे ज्यादा उनकी पोशाक को देख रहे थे। 

अमूमन तो विद्या साड़ी में ही दिखाई देती हैं। गणेश पूजा के लिए भी वह साड़ी में ही मंदिर पंहुचीं। लेकिन उनकी ब्लाउज काफी अजीब थी। जो एक तरह से उनकी मंदिर में उनकी 'डर्टी पिक्चर' का प्रदर्शन कर रही थी।

ब्लाउज पूरी तरह से बैक लैस थी। जब विद्या पूजा कर रहीं थीं तो पीछे से उनका लुक ग्लैमर और हॉट ही नजर आ रहा था। लोग उनको देख रहे थे और उनकी फोटो भी खींच रहे थे।

लेकिन कहने वालों का ये भी कहना था कि विद्या को इस तरह से मंदिर में नहीं आना चाहिए था। उनके फैंस भी ये नहीं समझ पा रहे थे कि विद्या ने ठीक परिधान पहना है ‌या इसमें कुछ गलत है।

शर्मनाक! दरिंदे नहीं, बेटे ने ही लूट ली मां की इज्जत

खबरों में रेप और हत्या के कई मामले आते रहते हैं, लेकिन इस घटना के बारे में सुनकर आपकी रूह कांप उठेगी। इस मामले में एक बेटे ने ही अपनी मां की इज्जत लूट ली।

इंफॉर्मेशन नाइजीरिया की खबर के अनुसार, बेटे की उम्र 27 साल है, जब‌कि मां की 60 साल है। नाइजीरिया के अदो इकीती मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई की है। 

कोर्ट ने इस कलयुगी बेटे ओमोथेहिंडे को फिलहाल जेल भेज दिया है और उसकी मां अस्पताल में भर्ती है। सुनवाई के दौरान वकील ने बताया कि उसने न केवल अपनी मां के साथ रेप किया बल्कि उन्हें बचाने आए एक शख्स को बुरी तरह मारकर जख्मी कर दिया।

मजिस्ट्रेट पैट्रिसिया अजीबादे ने लड़के को अक्टूगर तक जेल में ही रखने के आदेश दिए हैं। सुनवाई के दौरान वकील ने बताया कि उस समय मां घर में अकेली थी।

उसने एक पल को भी नहीं सोचा कि वो उसकी मां है और उसने उसके साथ बद्तमीजी करनी शुरू कर दी। उसने उसके कपड़े फाड़ डाले और उसके साथ रेप कर दिया।

इस दौरान मां को काफी चोट भी आई है जिसकी वजह से उन्हें गंभीर हालत में भर्ती कराया गया है।

Sep 16, 2013

सड़क पर पड़ा था शव, कट मारा तो पलटी वोल्वो और तीन लोगों की हो गई मौत

करनाल. जीटी रोड पर पड़े एक शव को बचाने के चक्कर में टूरिस्टों से भरी वोल्वो बस अनियंत्रित होकर फ्लाईओवर से नीचे गिर गई। तीन लोगों की जान चली गई, जबकि एक विदेशी नागरिक समेत 14 लोग गंभीर घायल हो गए। यात्री दिल्ली से मनाली जा रहे थे। कई यात्रियों को शीशे तोड़कर बाहर निकाला गया।

घायलों को ट्रॉमा सेंटर में दाखिल कराया गया। छह की हालत नाजुक है। बस में कुल 25 व्यक्ति सवार थे। घायल बस चालक ने बताया कि जब वह मधुबन से खाना खाकर करनाल पहुंचा तो सड़क पर एक व्यक्ति दिखाई पड़ा। उसे बचाने के लिए कट लगाया तो निर्मल कुटिया के पास बस पलटकर फ्लाईओवर से नीचे गिर गई। बाद में पता चला वह लाश थी। उसका सिर बुरी तरह से कुचला था।

जान‌िए इंटरनेट से आप कितना पैसा कमा सकते हैं? 

क्राउडवर्किंग यानी दुनिया में अलग-अलग हिस्सों में फैले लोगों से काम कराना तेजी से बढ़ता जा रहा है। कंपनियां दुनिया भर में घर पर बैठे लोगों से इंटरनेट पर बड़े-बड़े काम करा सकती हैं।

सवाल ये है कि आप अपने कम्प्यूटर से कितने पैसे कमा सकते हैं?

मैंने कुछ वेबसाइट पर साइन अप कर इंटरनेट पर छोटे-मोटे काम आज़माने का फैसला किया।

मैंने दो नियम तय किए। जो भी रकम मिलेगी वो परोपकार में जाएगी और मैं ऐसा कोई काम नहीं करूंगी जो मैं दिन में टेलीविज़न पर करते हुए खुश नहीं होती।

बीबीसी की प्रतिष्ठा को ध्यान में रखते हुए मैंने अपने सोशल मीडिया नेटवर्क को चेतावनी दी कि मैं एक प्रयोग कर रही हूं और उन्हें कुछ अजीब स्टेटस अपडेट के लिए तैयार रहना चाहिए।

पहली थी इनबॉक्स पाउंड्स, एक ऐसी वेबसाइट जो अचानक क्लिक करने वालों को कुछ सर्वे और छोटे-मोटे काम करने को कहती है।

मुझे साइन अप करने के लिए एक पाउंड (करीब 105 रुपए) का बोनस मिला।
एक विज्ञापन के बारे में 15 मिनट के एक सर्वे का जवाब देने पर मुझे 25 पेंस (25 रुपए) मिले।

मैंने एक पेंस में एक वीडियो देखा और एक ख़ास ब्रांड के मोबाइल फ़ोन को फ़ेसबुक पर एक पेंस में 'लाइक' किया।
बिल्कुल सही पढ़ा आपने, मुझे 'लाइक' करने के लिए रकम मिली।

बड़ा लुभावना लग रहा है लेकिन तब तक पैसे हाथ में नहीं आएंगे जब तक 20 पाउंड (2000 रुपए) नहीं कमा लेती।

कुल कमाई - तीन दशमलव शून्य छह पाउंड (करीब 320 रुपए)

स्वागबक्स नाम की वेबसाइट छोटे-मोटे काम करने के बदले पॉइंट देती है, ये पॉइंट आखिर में रकम में बदल जाएंगे और इन्हें पेपल या वाउचर के ज़रिए दिया जाएगा।

मैंने कुछ वीडियो देखे, गेम खेले और कुछ रकम कमाई - हालांकि ये बहुत कम थी।

एक दिन गेम खेलने और वीडियो देखने से मुझे 102 स्वागबक्स मिले - जो करीब 50 पेंस (50 रुपए) बैठते थे।
बड़ा भुगतान तब मिलेगा जब पांच पाउंड कमा लूं।

कुल कमाई - आधा पाउंड

अगली वेबसाइट थी कास्टिंगवर्ड्स

मैं उन लोगों के साथ जुड़ गई जो ऑडियो सुनते हैं और उन शब्दों को टाइप करते हैं।

तेजी से टाइप करने वालों को आसान लग सकता है इसलिए मैंने ग़लत फ़ैसला लिया और ट्रांसक्रिप्शन यानी सुनकर टाइप करने की चुनौती को लपक लिया।

ये आसान नहीं था - एक काम निपटाने में मुझे एक घंटा लग गया और मुझे जितना मिलना था उसमें से भी काफ़ी रकम उनके मानकों पर खरी न उतरने की वजह से काट ली गई।

मुझसे ये काम छीन लिया गया और अब मैं सिर्फ़ दूसरे लोगों के काम की समीक्षा कर सकती थी जब तक कि मेरा स्कोर सुधर नहीं जाता।

बड़ा भुगतान तब होता जब मैं एक डॉलर कमा लूं।

कुल कमाई - 37 पेंस (करीब 37 रुपए)

अमेज़न की मेकैनिकल तुर्क जैसी माइक्रोवर्किंग साइट मानवीय समझ के कामों (हिट्स) के लिए भुगतान करती हैं।

ये काम रचनात्मक लेखन, कोडिंग या और कुछ हो सकता है।

दुख की बात थी कि मेरा रजिस्ट्रेशन पूरा नहीं हुआ।

अमेज़न ने कहा: "मेकैनिकल तुर्क सिर्फ़ आमंत्रण पर रजिस्ट्रेशन के आधार पर काम करती है। काम करने वालों को रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू करने के लिए कहा जाता है और ईमेल से मिलने वाले आमंत्रण के आधार पर रजिस्ट्रेशन पूरा होता है।"

मैंने एक वेबसाइट क्लिकवर्कर पर साइन अप कर लिया।

पहले मैंने एक इंग्लिश टेस्ट पास किया और फिर रचनात्मक लेखन का एक टेस्ट।

100 फीसदी स्कोर करने की वजह से मुझे मोटा काम मिला।

जर्मन भाषा से अनूदित सामग्री के आधार पर मुझे टेनिस के लिए पहने जाने वाले कपड़ों की मेल ऑर्डर कैटेलॉग एंट्री तैयार करनी थी।

ये तुलनात्मक रूप से लुभावना काम था। मुझे 100 से कुछ ज़्यादा शब्द के लिए एक दशमलव शून्य पांच पाउंड मिलते, हालांकि आप उस व्यक्ति की दया पर हैं जिसने आपको ये काम दिया।

अगर वो ख़ुश नहीं हुए तो आप को कुछ नहीं मिलेगा।

मेरे साथ ऐसा तीन बार हुआ।

भुगतान हर हफ़्ते होना था।

कुल कमाई - चार दशमलव नौ पांच पाउंड (करीब 500 रुपए)

आखिर मैंने फीवर वेबसाइट पर काम शुरू किया, इस वेबसाइट पर लोग "गिग्स" यानी कला के सीधे प्रदर्शन के तौर पर सेवाओं का विज्ञापन देते हैं।

कुछ सेवाएं वाकई रहस्यमय हैं, उदाहरण के लिए एक तरबूज में कुछ ढूंढने या एक चिकन की तस्वीर बनाने के लिए पांच डॉलर।

इससे उत्साहित हो कर मैंने अपनी संगीत और लेखन की क्षमता का इस्तेमाल किया। मेरे एक फेसबुक दोस्त ने एक असंभव चीज़ के लिए मुझसे माइल्स-डेविल्स की तरह की पियानो थीम के लिए कहा।

हालांकि इन कामों में थोड़ा ज़्यादा वक्त लगा लेकिन ये मज़ेदार थे। काम तो निपट गए लेकिन फीवर वेबसाइट 20 फीसदी रकम काट लेती है। मुझे सिर्फ़ दो दशमलव पांच सात पाउंड यानी करीब 270 रुपये ही मिले।

कुल कमाई - 10।28 पाउंड (करीब 1040 रुपए)

कुल कमाई - 19।16 पाउंड (करीब 1950 रुपए)

कुल 37 घंटे काम किया।

साफ़ है उतने पैसे नहीं जितने पैसों की मुझे उम्मीद थी।

ज़्यादातर समय इस बात का पता लगाने में बीत गया कि कौन सी वेबसाइट कितनी रकम देती है। टच टाइपिंग, तेज़ी से रचनात्मक लेखन या कुछ अनूठा करने पर कम समय में ज़्यादा पैसे कमाने का मौका मिला।

हां, इस तरह से काम करने में पैसे तो हैं लेकिन मुझे लगता है कि जो काम अभी मैं कर रही हूं वो कुछ ज़्यादा समय तक करूंगी। इस तरह जो पैसे मिले वो बीबीसी के चिल्ड्रन इन नीड अपील को जाएंगे।

Sep 14, 2013

Jokes लव लेटर 

संता (बंता से): यार, तू ये क्‍या देख रहा है?
बंता: ये मेरी गर्लफ्रेंड का लव लेटर है....
संता: भाई, यह तो खाली है....
बंता: हां, आजकल हमारी बातचीत बंद है।

बेचारा बच्चा! गया था क्या करने और पहुंच गया कहां

उत्तर पूर्वी चीन के यांजी में एक अजीबोगरीब हादसे में 20 महीने का बच्चा मल मूत्र निकासी के लिए बने ड्रेन में गिर गया। बच्चा खुद से शौच करने की कोशिश में ड्रेन में गिरा जिसके बाद उसे वहां से निकालने के लिए एमरजेंसी सेवाओं की मदद लेनी पड़ी।

डेली मेल की ख्‍ाबर के अनुसार, चीन में शौच स्थान आम तौर पर एक गड्ढ़े समान होते हैं। शौच के लिए सार्वजनिक शौचालय में गए इस बच्चे का शौच करते वक्त संतुलन ब‌िगड़ गया और वो ड्रेन में ही गिर गया।

मल मूत्र से भरे ड्रेन में खड़े होने की कोशिश के दौरान बच्चे ने अपनी मां को जब चींखकर पुकारा तो वो ये मंज़र देखकर दंग रह गईं। कुछ देर में वहां पहुंचे अग्निशमन दस्ते के जवानों ने मास्क पहनकर इस सकरे ड्रेन में घुसे औक काफ़ी मशक्कत के बाद बच्चे को निकाल पाए।

बच्चा इस दौरान किसी तरह से मल मूत्र में डूबने से बचने की कोशिश करता रहा। बच्चे को सड़क पर ही नहलाने के बाद उसे जल्दी जल्दी अस्पताल पहुंचाया गया। इस दौरान बच्चे की मां उसके आंख, नाक और कान साफ करती रही। पूरे हादसे में बच्चे को कोई गंभीर चोट तो नहीं आई लेकिन वो सदमें में ज़रूर है।

चर्चा में: पेट की कब्ज पर फिल्म, कंगना का शौक 

इन दिनों ‌बॉलीवुड गलियारों में एक ऐसी फिल्म की चर्चा है जिसका विषय पेट की कब्ज है। 

*मद्रास कैफे जैसी गंभीर फिल्म बनाने वाले फिल्म निर्देशक शुजीत सरकार अब हल्के-फ़ुल्के विषय पर फिल्म बनाना चाहते हैं। उन्होंने विषय चुन लिया है। शुजीत सरकार पेट की कब्ज से पीड़ित एक व्यक्ति की जिंदगी पर फिल्म बनाएंगे। जाहिर है कि यह एक व्यंग्यात्मक फिल्म होगी। 

*कंगना रनौत इन दिनों पिस्तौल चलाना सीख रही हैं! हमेशा काम के प्रति गंभीर रहने वाली कंगना पर कोई संकट नहीं आया है। बल्कि वह अपनी अगली फिल्म ‘रिवॉल्वर रानी’ के लए यह प्रेक्टिस कर रही हैं। असल में इस फिल्म से पहले कंगना ने कभी रिवॉल्वर पकड़ी तक नहीं थी। देखिए, फिल्में क्या क्या करना सिखाती हैं।

*वक्त के साथ सब बदल जाता है। कभी करन जौहर की फिल्म ‘माई नेम इज खान’ में दो मिनट का रोल पाकर उनका गुणगान करने वाली पल्लवी शारदा अब कह रही हैं कि करन उनके गॉडफादर नहीं हैं। पल्लवी फिल्म ‘बेशरम’ की हीरोइन हैं। सो, आजकल इसके निर्देशक अनुभव कश्यप के बारे में बता रही हैं कि वही मेरे सब कुछ हैं!

*अभी तक बॉलीवुड के लोगों पर विदेशी फिल्मों की नकल के आरोप लगते रहे हैं। हाल में बॉलीवुड फिल्म ‘ब्लैक’ (निर्देशकः संजय लीला भंसाली, 2005) की नकल तुर्की में बनने की बात सामने आई है। भंसाली ने इस पर नाराजगी व्यक्त की है कि उनसे किसी ने इस फिल्म अधिकार नहीं खरीदे! वैसे आश्चर्य की बात है कि खुद भंसाली पर ‘ब्लैक’ के लिए ‘द मिरेकल वर्कर’ से प्रेरित होने के आरोप लगे तो उन्होंने कभी कुछ नहीं कहा।