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Sep 21, 2013

मुजफ्फरनगरः लाशें उगलने वाली गंगनहर का पानी रोका

जौली गंगनहर पर हुए हमले को लेकर 13 दिन से मच रही हायतौबा के बाद शुक्रवार को पानी रोका जा सका। गंगनहर में ट्रैक्टर और लाशें होने की आशंका को लेकर यह कदम उठाया गया है।

अफसरों ने इलाके का भ्रमण कर लोगों का दर्द सुना। सात सितंबर की शाम को जौली नहर पर हुए अप्रत्याशित हमले के बाद से बड़ी अनहोनी का शोर है।

हमले में सात लोगों की मौत के बाद 14 ट्रैक्टर जलाने के साथ गंगनहर में फेंक दिया गया था। यह तमाम लाशें एक-एक कर बरामद हुईं।

पहले दिन से इलाके के लोग नहर का पानी बंद कराने की मांग कर रहे थे, लेकिन उपेक्षा के चलते प्रशासन कोई फैसला नहीं ले सका।

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन ने गुरुवार को घटनास्थल का अवलोकन करने के साथ लोगों से बातचीत की।

आशंकाओं के मद्देनजर जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने शासन से गंगनहर का पानी चार दिन के लिए बंद किए जाने का अनुरोध किया था।

शासन की पहल पर पथरी से शुक्रवार को गंगनहर का पानी रोक दिया गया। डीएम और एसएसपी ने इलाके का भ्रमण करने के बाद बताया कि शनिवार सुबह तक पूरा पानी उतर जाएगा।

इसी के साथ यह भी साफ हो जाएगा कि पानी में ट्रैक्टर अथवा दूसरा वाहन तो नहीं पड़ा। दूसरा शवों को लेकर भी भ्रांति दूर हो जाएगी।

Sep 16, 2013

हनीमून के दौरान पड़ा छह बार द‌िल का दौरा

दिल का एक दौरा हमें दहशत में ला देता है। सोचिए 33 साल के नौजवान पर क्या गुजरी होगी जब उसे एक नहीं दिल के छह दौरे पड़े।

हुआ यूं कि ब्रिटेन में पेशे से होटल व्यवसायी एन्ड्रयू ब्रिटन की  शादी 2012 के नवंबर महीने में हुई।

एन्ड्रयू ने अपनी नई नवेली दुल्हन लॉरेन के साथ मालदीव में हनीमून मनाने की योजना बनाई। हनीमून पर जाते समय वे एकदम तंदुरुस्त थे। मगर मालदीव पहुंचने के एक घंटे के भीतर ही वे कुछ असहज महसूस करने लगे।

एन्ड्रयू को वहां दिल के छह दौरे आए। दम घोंट देने, मरणासन्न कर देने वाले दिल के छह-छह दौरे।

एन्ड्रयू ब्रिटन बताते हैं कि हनीमून पर जाते समय सब कुछ ठीक था। 

उन्होंने बताया, "मैं एक स्क्वैश खिलाड़ी हूं और हमेशा ट्रेनिंग पर भी जाता रहता हूं। इसलिए तन-मन से हमेशा फिट रहता हूं।"

ब्रिटन की तबीयत हवाई जहाज में ही खराब होनी शुरू हो गई थी। पहले उन्हें लगा कि ये मामूली सर्दी है। फूड प्वॉयजनिंग की भी आशंका हो रही थी।

मालदीव में एन्ड्रयू होटल के कमरे में ही बने रहे। वे खुद को काफी कमजोर महसूस कर रहे थे।

पत्नी लॉरेन ने बताया, "सच कहूं तो शुरू-शुरू में मैंने एन्ड्रयू की ढीली तबीयत को गंभीरता से नहीं लिया। मुझे लगा कि सफर का असर होगा।"

लॉरेन बताती हैं, "तब आधी रात थी। एन्ड्रयू मेरे पास आए और कहने लगे कि वे सांस नहीं ले पा रहे। उनकी छाती में भी दर्द हो रहा था। मैं डर गई। तुरंत घंटी बजाई और अस्पताल जाने के लिए स्ट्रेचर मंगवाया।"

एन्ड्रयू पसीने से तर-ब-तर हो रहे थे। वे बताते हैं, "मैं हांफ रहा था। बेहोशी जैसी छा रही थी। सांसें छूट रहीं थीं।"

वे जब अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टरों ने पहले बताया कि उन्हें स्वाईन फ्लू हुआ है। उनकी तबीयत बिगड़ती ही चली गई। उन्हें इन्क्यूबेटर और दूसरे लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया।

लॉरेन ने बताया, "एन्ड्रयू के बेड का पर्दा खींच दिया गया। अलार्म बजने लगे। अचानक छह-सात डॉक्टर उनके बेड की तरफ दौड़े। वे सब चिल्ला रहे थे। मैं पर्दे के बाहर बैठी घबराहट से कांप रही थी।"

तभी एक डॉक्टर ने लॉरेन को आकर बताया कि एन्ड्रयू को दिल का दौरा पड़ा है। इसके बाद उन्हें आईसीयू में रखा गया।

एन्ड्रयू के दिल ने काम करना लगभग बंद कर दिया था। इलाज के बाद उनकी तबीयत कुछ स्थिर हुई।
मगर अगली ही सुबह एन्ड्रयू को दिल का दूसरा दौरा पड़ा।

लॉरेन बताती हैं,"मैं सुबह-सुबह एन्ड्रयू से मिलने गई थी। बात करते-करते अचानक उनकी आंखें उलटने लगीं। मैंने अलार्म बजाया।"

अगले दिन लॉरेन को बताया गया कि एन्ड्रयू को यदि एक दिन में किसी अच्छे अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया तो उनकी जान को खतरा हो सकता है।

फिर उन्हें बैंकॉक लाया गया। वहां वे दो हफ्ते रहे। इस दौरान वे लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रहते थे। बोलना मुश्किल था इसलिए कागज और कलम संवाद का जरिया बने। एक दिन एन्ड्रयू ने कागज पर लिख कर पूछा, "क्या मैं मरने वाला हूं?"

तब तक एन्ड्रयू को दिल के छह दौरे पड़ चुके थे। एन्ड्रयू कहते हैं, "मैं कागज पर छह बार मर चुका था।"

एन्ड्रयू कहते हैं, "मुझे बताया गया कि मेरी इस गंभीर हालत की वजह कोई वायरस है। शायद कोई आम वायरस, या फ्लू वायरस। मेरा शरीर उससे लड़ नहीं पा रहा। इसका असर दिल पर हो रहा है।"

एन्ड्रयू की दिल की बीमारी ठीक करने के लिए उनके दिल के दो ऑपरेशन हुए।

वे कहते हैं, "मैं खुश हूं कि मैं अपनी बीमारी से लड़ा और जिंदगी में वापसी की। शरीर की सारी गतिविधियां सामान्य हैं। मैं चाहता हूं, हम जल्दी अपने घर जाएं।"

फिलहाल एन्ड्रयू को किसी अच्छे 'हार्ट डोनर' का इंतजार है। तब से अब तक नौ महीने गुजर चुके हैं। वे ब्रिटेन के अस्पताल के वार्ड में दिल के प्रत्यारोपित किए जाने का इंतजार कर रहे हैं।

गजब! इस आदमी ने तो अपनी चर्बी से ही बना दिया साबुन 

ये जानते तो हम सभी है कि साबुन बनाने में चर्बी का इस्तेमाल होता है लेकिन हममे से शायद ही किसी ने कभी शरीर की चर्बी से साबुन बनाने की बात सोची होगी।

क्रेजीन्यूज 24 पर चल रही खबर के मुताबिक, मियामी स्थित एक कलाकार ओरेस्टेस डे ला पाज ने अपने दिल, आत्मा और चर्बी से 20 साबुन बनाए हैं।
KRIPYA UPAR DIYE GYE VIGYAPAN PE CLICK KARE, TAKI HUM AAPKO FREE NEWS PROVIDE KAR SAKE THANKS A LOT
मानव चर्बी से बने ये साबुन करीब 63 हजार रुपए में मौजूद हैं। ओरेस्टेस ने लिपोसक्‍शन (कृत्रिम उत्पदों को बनाने वाली प्रक्रिया) प्रक्रिया द्वारा बनाया है। पिछले साल दिसंबर में शरीर की चर्बी निकालने के दौरान उन्होंने इससे साबुन बनाने का फैसला किया था।

दरअसल ओरेस्टेस एक मेक-अप आर्टस्टि रह चुके हैं और इसके चलते उन्हें पता है कि लोगों को इंसानी चीजों से बने सामान या सौन्दर्य प्रसाधन कितने पसंद आते हैं।

अपनी इसी सोच का फायदा उठाते हुए उन्होंने ये साबुन बनाया है। नारियल के तेल और अन्य तेलों से अलग इस साबुन में करीब 25 फीसदी मानव चर्बी का इस्तेमाल किया गया है। 

Sep 14, 2013

Jokes लव लेटर 

संता (बंता से): यार, तू ये क्‍या देख रहा है?
बंता: ये मेरी गर्लफ्रेंड का लव लेटर है....
संता: भाई, यह तो खाली है....
बंता: हां, आजकल हमारी बातचीत बंद है।

बर्फ नहीं, इस बाप ने फ्रिज में जमा दी अपनी बेटी

छह हफ्ते की बच्ची और ऐसी शर्मनाक हरकत कि रूह कांप जाए। वॉशिंगटन में एक बाप ने अपनी बच्ची को चुप कराने के लिए उसे फ्रीजर में बंद कर दिया।

क्रेजी न्यूज 24 की खबर के अनुसार, 25 साल के टेलर जेम्स पर घरेलू हिंसा का आरोप लगाया गया है। सुनवाई के दौरान वकील ने बताया कि जेम्स बच्चे को फ्रीजर में रखने के बाद सो गया था।

उसे इस बात का होश तक नहीं था कि उसने बच्चे को फ्रीजर में रखा है। उसकी नींद तो उस समय खुली जब बच्चे की मां घर आई।

जब मां घर पहुंची तो उसने फ्रीजर खोला। फ्रीजर खोलते ही उसके होश उड़ गए उसने बच्चे को फ्रीजर से बाहर निकाला। वो पुलिस को फोन करके बुलाना चाहती थी लेकिन टेलर ने उसे फोन नहीं दिया। किसी तरह उसने पड़ोसियों की मदद से पुलिस को फोन किया।

इधर बच्ची की हालत काफी खराब हो चुकी थी और उसके हाथ-पैर भी टूट गए थे। हालांकि उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती तो करा दिया गया और डॉक्टरों को उम्मीद है कि वो जल्दी ही ठीक हो जाएगी।

आशंका इस बात की भी है कि इस मामले के तहत टेलर को अपनी बाकी बची जिंदगी जेल में बितानी पड़े।

चर्चा में: पेट की कब्ज पर फिल्म, कंगना का शौक 

इन दिनों ‌बॉलीवुड गलियारों में एक ऐसी फिल्म की चर्चा है जिसका विषय पेट की कब्ज है। 

*मद्रास कैफे जैसी गंभीर फिल्म बनाने वाले फिल्म निर्देशक शुजीत सरकार अब हल्के-फ़ुल्के विषय पर फिल्म बनाना चाहते हैं। उन्होंने विषय चुन लिया है। शुजीत सरकार पेट की कब्ज से पीड़ित एक व्यक्ति की जिंदगी पर फिल्म बनाएंगे। जाहिर है कि यह एक व्यंग्यात्मक फिल्म होगी। 

*कंगना रनौत इन दिनों पिस्तौल चलाना सीख रही हैं! हमेशा काम के प्रति गंभीर रहने वाली कंगना पर कोई संकट नहीं आया है। बल्कि वह अपनी अगली फिल्म ‘रिवॉल्वर रानी’ के लए यह प्रेक्टिस कर रही हैं। असल में इस फिल्म से पहले कंगना ने कभी रिवॉल्वर पकड़ी तक नहीं थी। देखिए, फिल्में क्या क्या करना सिखाती हैं।

*वक्त के साथ सब बदल जाता है। कभी करन जौहर की फिल्म ‘माई नेम इज खान’ में दो मिनट का रोल पाकर उनका गुणगान करने वाली पल्लवी शारदा अब कह रही हैं कि करन उनके गॉडफादर नहीं हैं। पल्लवी फिल्म ‘बेशरम’ की हीरोइन हैं। सो, आजकल इसके निर्देशक अनुभव कश्यप के बारे में बता रही हैं कि वही मेरे सब कुछ हैं!

*अभी तक बॉलीवुड के लोगों पर विदेशी फिल्मों की नकल के आरोप लगते रहे हैं। हाल में बॉलीवुड फिल्म ‘ब्लैक’ (निर्देशकः संजय लीला भंसाली, 2005) की नकल तुर्की में बनने की बात सामने आई है। भंसाली ने इस पर नाराजगी व्यक्त की है कि उनसे किसी ने इस फिल्म अधिकार नहीं खरीदे! वैसे आश्चर्य की बात है कि खुद भंसाली पर ‘ब्लैक’ के लिए ‘द मिरेकल वर्कर’ से प्रेरित होने के आरोप लगे तो उन्होंने कभी कुछ नहीं कहा। 

30 साल बाद फेसबुक पर रेपिस्‍ट को ढूंढ खिलाई जेल की हवा

फेसबुक पर अपना अकाउंट खोलना और रोजाना विजिट करना एक आम बात है। लेकिन कभी आपने सोचा है फेसबुक के जरिए अपराधी को ढूंढ़कर पकड़वाया भी जा सकता है?

जी हां, आपको ये जानकर हैरानी होगी कि फेसबुक अकाउंट के जरिये 42 वर्षीय मलिना थॉमस नाम की एक महिला ने न केवल इस बात का पता लगाया कि 13 साल की उम्र में उसके साथ किसने रेप किया था बल्कि उसने एस रेपिस्‍ट को 17 की जेल की सजा भी दिलवाई।

डेली मेल की खबर के मुताबिक, अब से तकरीबन 30 साल पहले जब मलिना महज 13 साल की थी, ने स्वीडन के बल्लेट स्कूल की एक प्रतियोगिता जीती थी जिसके तहत उन्हें स्केटिंग के लिए बहार जाना था।

मलिना के पिता एक गैराज में काम करते थे और उन्होंने अपनी बेटीस्केटिंग के लिए जाने की इजाजत दे दी। मलिना के साथ उनका पहला ब्‍वॉयफ्रेंड भी था जिसने सुनसान जगह का फायदा उठाकर मलिना का रेप कर दिया।

मलिना ने चाहकर भी किसी को ये बात नहीं बताई, अपने घरवालों को भी नहीं। मलिना ने जब हाल ही में फेसबुक पर इस बात को पोस्ट किया तो उन्होंने पाया कि उनकी पोस्‍ट पर उन्हें दो रिस्पांस मिले हैं। उन दोनों के साथ भी रेप हुआ था और सबूतों के आधार पर रेपिस्‍ट करने वाला आदमी वही था जिसने मलिना के साथ रेप किया था।

फिर क्‍या था मलिना को फेसबुक के जरिए अपने रेपिस्‍ट के खिलाफ कुछ सबूत मिले,जिसे मलिना ने पुलिस को दे दिए। अब 53 वर्षीय रेपिस्‍ट को 17 साल जेल में रहने की सजा सुनाई गई है।

कुरूक्षेत्र में ही क्यों लड़ा गया महाभारत का महायुद्ध 

आज से हजारों साल पहले हरियाणा के कुरूक्षेत्र में कौरवों और पाण्डवों के बीच महाभारत का महायुद्ध लड़ा गया था। इस युद्ध में प्राचीन भारत के लगभग सभी राजे-महाराजे और योद्धाओं ने भाग लिया। लाखों लोगों ने इस महायुद्ध अपने प्राण गंवाएं। उन दिनों युद्ध के लिए स्थान निर्धारित किया जाता ताकि आम जनता को युद्ध से हानि नहीं हो।

जब तय हो गया कि कौरव और पाण्डवों के बीच महायुद्ध होगा तब युद्धक्षेत्र की तलाश शुरू हुई। भगवान श्री कृष्ण जानते थे कि इस युद्ध में लाखों लोग वीरगति को प्राप्त होंगे। इसलिए ऎसे स्थान की तलाश में थे जहां मरने से आत्मा को मुक्ति मिल जाए।

इसी तलाश के क्रम में वह कुरूक्षेत्र पहुंचे। यहां कृष्ण ने अद्भुत दृश्य देखा। एक किसान हल जोत रहा था तभी एक विषैले सांप ने किसान के पुत्र का डस लिया। किसान ने वहीं पुत्र का अंतिम संस्कार कर दिया और खेत जोतने लगा। किसान पुत्र मोह में पड़कर कर्म से नहीं हटा। 

कृष्ण ने उसी समय तय किया कि यही वह स्थान है जहां धर्म युद्ध हो सकता है। यहां युद्ध होने पर योद्धा कर्म से हटेंगे नहीं और धर्म की जीत होगी। कुरूक्षेत्र के विषय में शिव पुराण में भी बताया गया है कि यह धर्मक्षेत्र है जहां दान, तप करने से कई गुणा पुण्य प्राप्त होता है। इस धर्मक्षेत्र में प्राण त्याग करने से आत्मा को सद्गति प्राप्त होती है।

भगवान विष्णु ने एक बार कौरव और पाण्डवों के पूर्वज महाराज कुरू को कुरूक्षेत्र में दर्शन देकर कहा था कि आपके पुण्य कर्मों से इस क्षेत्र का नाम कुरूक्षेत्र होगा। जिस व्यक्ति की यहां मृत्यु होगी वह सीधा स्वर्ग जाएगा। इन्हीं कारणों से महाभारत का महायुद्ध कुरूक्षेत्र में लड़ गया था।

लापरवाह वाहन चालकों पर भारी पड़ेगा ई-चालान 

रोहतक। आईजी अनिल राव ने वीरवार को अपने कार्यालय में आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक चालान सिस्टम की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि नई तकनीकी शुरू करने से बार-बार यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर रोक लगेगी। इसके अलावा चोरी के वाहनों की पहचान हो सकेगी। वहीं, मौके पर चालान का भुगतान हो सकेगा। यह योजना सोनीपत, रोहतक, झज्जर और पानीपत में शुरू की गई है। 
वीरवार को आईजी कार्यालय में आईजी अनिल राव ने चालान तकनीकी सिस्टम की शुरुआत की। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक रोहतक राजेश दुग्गल, पुलिस उपाधीक्षक यातायात पुष्पा खत्री, यातायात प्रभारी निरीक्षक सुनीता और अन्य ट्रैफिक पुलिसकर्मी मौजूद रहे। पुलिस महानिरीक्षक ने सहायक उपनिरीक्षक गुरुदेव सिंह को प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया। आईजी ने बताया कि नोएडा की एक कंपनी कॉमडेल से ई-चालान मशीन खरीदी गई है। रोहतक मंडल के सभी जिलों सोनीपत, पानीपत, झज्जर और रोहतक के स्टॉफ को इस मशीन को चलाने की ट्रेनिंग भी कंपनी द्वारा दी जा रही है। इसमें चोरी के वाहन की भी पहचान की जा सकती है। 

ऐसे होगा ई-चालान
आईजी ने बताया कि यह मशीन इंटरनेट से जुड़ी होगी, जिसके तहत चालान कटने के तुरंत बाद ही इसका ब्यौरा जिला चालानिंग ब्रांच पुलिस लाइन रोहतक और पुलिस मुख्यालय पंचकूला पर पहुंच जाएगा। गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर भरते ही यह भी पता चल जाएगा कि पहले कितने चालान हुए हैं। यदि चालक उसी समय मौके पर ही चालान का भुगतान करना चाहता है तो तुरंत चालान का भुगतान किया जा सकेगा व उसी समय जुर्माना रसीद दी जाएगी।

जानिए, आठ साल तक मोदी का हरियाणा से क्या रहा नाता?

लोकसभा चुनाव के शंखनाद से पहले हरियाणा की धरती एक बार फिर से नरेंद्र मोदी लिए शुभ साबित होगी। हरियाणा भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का यह मानना है कि हरियाणा की धरती नरेंद्र मोदी को हमेशा फलीभूत हुई है। 

आठ साल हरियाणा के प्रभारी रहने के बाद ही सीधे वर्ष 2001 में नरेंद्र मोदी को गुजरात में मुख्यमंत्री की कमान सौंपी गई। केशुभाई पटेल के इस्तीफे के बाद मोदी को यह कमान मिली थी।

मोदी वर्ष 1992 से 2000 तक हरियाणा भाजपा के प्रभारी रहे हैं। अब प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार चुने जाने के बाद वे पहली बार हरियाणा के रेवाड़ी में कदम रखेंगे। 

15 सितंबर को रेवाड़ी में होने वाली पूर्व सैनिकों की रैली को लेकर भाजपा नेताओं का उत्साह कई गुना बढ़ गया है। 17 सितंबर को मोदी का जन्मदिन भी है। जिसकी तैयारियां अभी से शुरू हो गई हैं।

रेवाड़ी में मोदी के पोस्टरों पर शरारती तत्वों द्वारा पोती गई कालिख भी अब स्थानीय प्रशासन के लिए आफत का सबब बन गई है। 

रैली से पहले मोदी की सुरक्षा संबंधी इंतजाम को लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रामबिलास शर्मा ने पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की।

फिल्म समीक्षा -- कुछ हिस्सों में डरा भी देती है हॉरर स्टोरी 0

एक समय की बात है। सात दोस्त थे। एक रात वे बार में पार्टी कर रहे थे। तभी भूत-प्रेत की चर्चा चल पड़ी। किसी ने कहा कि भूत होते हैं, किसी ने कहा नहीं होते। बातों-बातों में हुआ कि चलो देख ही लेते हैं, सचमुच भूत होते हैं या नहीं।

शहर में एक विशाल होटल खाली पड़ा था, जिसके बारे में लोग कहते थे कि वहां भूत है। सातों कार में बैठकर होटल जा पहुंचे। अंदर गए तो सन्नाटा था, अंधेरा था। थोड़ी देर के हंसी-मजाक और चुहलबाजी के बीच लगा कि कुछ गड़बड़ है।

.और धीरे-धीरे हंसी-मजाक चीखने-चिल्लाने में बदल गई। एक-एक कर दोस्त मारे जाने लगे। होटल में एक भूत है। एक लड़की का भूत। कौन है वह लड़की और क्या चाहती है...? क्या दोस्तों में से कोई बच सकेगा या सबकी कब्र वहीं बन जाएगी...?

निर्देशक आयुश रैना की फिल्म ‘हॉरर स्टोरी’ पर्दे पर रहस्य और रोमांच को रचती है। निर्देशक कुछ मौकों पर डराने में भी कामयाब हैं। हालांकि कई बार अभिनेताओं की कमजोरी के कारण सीन में वह बात नहीं आ पाती, जो उभरनी चाहिए। साथ ही कुछ ऐसे दृश्य भी हैं जो आप पहले कई फिल्मों में देख चुके हैं।

दरवाजे का अपने आप बंद होना। अचानक पीछे से हाथ आना। जहां भूत की संभावना दिखे, वहां भूत का न निकलना। वैसे फिल्म में जलती-बुझती लाइटों और संगीत का खूबसूरती से इस्तेमाल किया गया है। कुछ दृश्य वाकई सिरहन पैदा करते हैं। 

लेकिन यह डर ऐसा नहीं है कि आपके दिमाग में बैठ जाए और सिनेमाहॉल से निकल कर घर तक आए। जिन लोगों को डरावनी फिल्में देखने में मजा आता है, हॉरर स्टोरी उनके लिए है। निर्देशक ने कहानी को कुशलता से कहा है। हालांकि इसे कुछ और कसा जा सकता था।

फिल्म समीक्षा -- कुछ हिस्सों में डरा भी देती है हॉरर स्टोरी 0

एक समय की बात है। सात दोस्त थे। एक रात वे बार में पार्टी कर रहे थे। तभी भूत-प्रेत की चर्चा चल पड़ी। किसी ने कहा कि भूत होते हैं, किसी ने कहा नहीं होते। बातों-बातों में हुआ कि चलो देख ही लेते हैं, सचमुच भूत होते हैं या नहीं।

शहर में एक विशाल होटल खाली पड़ा था, जिसके बारे में लोग कहते थे कि वहां भूत है। सातों कार में बैठकर होटल जा पहुंचे। अंदर गए तो सन्नाटा था, अंधेरा था। थोड़ी देर के हंसी-मजाक और चुहलबाजी के बीच लगा कि कुछ गड़बड़ है।

.और धीरे-धीरे हंसी-मजाक चीखने-चिल्लाने में बदल गई। एक-एक कर दोस्त मारे जाने लगे। होटल में एक भूत है। एक लड़की का भूत। कौन है वह लड़की और क्या चाहती है...? क्या दोस्तों में से कोई बच सकेगा या सबकी कब्र वहीं बन जाएगी...?

निर्देशक आयुश रैना की फिल्म ‘हॉरर स्टोरी’ पर्दे पर रहस्य और रोमांच को रचती है। निर्देशक कुछ मौकों पर डराने में भी कामयाब हैं। हालांकि कई बार अभिनेताओं की कमजोरी के कारण सीन में वह बात नहीं आ पाती, जो उभरनी चाहिए। साथ ही कुछ ऐसे दृश्य भी हैं जो आप पहले कई फिल्मों में देख चुके हैं।

दरवाजे का अपने आप बंद होना। अचानक पीछे से हाथ आना। जहां भूत की संभावना दिखे, वहां भूत का न निकलना। वैसे फिल्म में जलती-बुझती लाइटों और संगीत का खूबसूरती से इस्तेमाल किया गया है। कुछ दृश्य वाकई सिरहन पैदा करते हैं। 

लेकिन यह डर ऐसा नहीं है कि आपके दिमाग में बैठ जाए और सिनेमाहॉल से निकल कर घर तक आए। जिन लोगों को डरावनी फिल्में देखने में मजा आता है, हॉरर स्टोरी उनके लिए है। निर्देशक ने कहानी को कुशलता से कहा है। हालांकि इसे कुछ और कसा जा सकता था।

Sep 12, 2013

यौन हमलों से बचाएगी ‘अम्मा’ की डिवाइस

महिलाओं की सुरक्षा को लेकर जुटे केरल के युवा साइबर पेशवरों ने एपीएसएस डिवाइस इजात की है, जो उनकी सुरक्षा करेगी।

यह डिवाइस एक बटन दबाने पर वॉयस कॉल या एसएमएस से तुरंत कई स्थानों पर संवाद कायम करने के साथ पुलिस स्टेशन, अस्पताल और फायर स्टेशन को स्वचलित सूचना प्रदान कर देगी। 

माता अमृतानंदमयी मठ के अमृता पर्सनल सेफ्टी सिस्टम (एपीएसएस) की मदद से साइबर एक्सपर्ट ने इसे तैयार किया है। 

यौन अपराधियों से बचने के लिए महिलाओं को अब मिर्ची पाउडर या स्प्रे रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी। कोल्लम स्थित अमृता विश्वविद्यालय के साइबर प्रणाली एवं नेटवर्क केंद्र की निदेशक डॉ. कृष्णाश्री अच्युतन ने बताया कि एपीएसएस एक दिखाई नहीं देने वाली, पहनने योग्य और आसानी से संचालित इलेक्ट्रोनिक्स डिवाइस है। 

उन्होंने बताया कि अम्मा के नाम से मशहूर माता अमृतानंदमयी ने 16 दिसंबर की दिल्ली की घटना व महिलाओं प्रति बढ़ते अपराधों को लेकर इस तरह की डिवाइस को लॉंच करने का निर्देश दिया था। 

इस डिवाइस को एक बाली, अंगूठी या अन्य किसी भी एक्सेसरीज में आसानी से छिपाकर लगाया जा सकता है। इलेक्ट्रोनिक चिप के जरिए संचालित इस डिवाइस में कुछ नंबर फीड किए जा सकेंगे और एक बटन दबाकर वॉयस मेल के जरिए खतरे के समय युवती सभी नंबरों पर एक साथ सूचना दे सकेगी। 

इस डिवाइस को जल्द ही ऐसी प्रौद्योगिकी से लैस किया जाएगा, जिससे घटनाओं की वीडियो टेपिंग भी हो सके।
मठ के सूत्रों के अनुसार इस डिवाइस का सफल प्रयोग तो कर लिया गया है। 

लेकिन इसकी लॉंचिंग के समय अम्मा ही इसकी सभी विशेषता के बारे में बताएंगी। बताया जाता है कि इसकी कीमत आम महिलाओं की भी पहुंच के भीतर 500 से 1000 रुपये के बीच होगी। 

27 सितंबर को माता अमृतानंदमयी के जन्मदिन के दिन इस डिवाइस की लॉंचिंग की जाएगी। इस डिवाइस की विशेषता यह भी है कि वह ऐसे ग्रामीण क्षेत्रों में भी काम करेगी जहां संचार की गति काफी कम है। 

29 अमेरिकी पेटेंट की लेखिका डॉ. अच्युतन के अनुसार 15 से अधिक सुविधाओं से युक्त इस डिवाइस को मानसिक रूप से विकलांग लोगों के सुरक्षा कवच के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

मुसलमान के घर से विदा हुई हिंदू दुल्हन

धर्म के नाम पर एक दूसरे के दुश्मन बने लोगों के लिए रुड़की के एक मुस्लिम परिवार ने मानव प्रेम की एक मिशाल कायम की थी।

रेलवे स्टेशन पर मिली पंद्रह साल की पायल को न सिर्फ चार साल तक पाला पोसा बल्कि बाद में उसकी शादी भी करवाई।


शादी के बाद भी पायल आज भी शानू रसूल के घर अपने मायके की तरह आती है और उसी तरीके से विदा भी किया जाता है।

जानकारी के अनुसार झारखंड की पायल अनाथ थी। उसके परिचितों ने उसे छोटी उम्र में जम्मू कश्मीर किसी हाथ बेच दिया। वहां जुल्मों का शिकार हुई भाग निकली और रुड़की रेलवे स्टेशन पर पहुंच गई।

लावारिस हालत में मिली पायल को शेखपुरी निवासी शानू रसूल के परिवार ने गोद ले लिया। मुस्लिम परिवार ने उसे घर में एक कमरा दे दिया और हिंदू रिति रिवाज से रहने की इजाजत भी।

उसके कमरे में पूजा पाठ करने के लिए एक लकड़ी का मंदिर भी बनाया गया। मुस्लिम परिवार के साथ रहने के बाद भी उसने अपने आप को अकेला नहीं समझा।

दो साल पहले 19 साल की होने पर शानू रसूल के परिवार ने उसके लिए हिंदू वर की तलाश की। वर की तलाश पूरे होने पर हिंदू रिति रिवाज से उसकी शादी कर दी। अब पायल का एक बेटा भी है।

ससुराल मुज्जफनगर के सिसौली गांव में है। पायल अब भी शानू रसूल के घर आती-जाती है। रसूल परिवार भी उसके साथा मायके वालों की तरह पेश आते हैं। उसे अपनी बेटी तरह हर बार ससुराल के लिए कुछ उपहार देकर विदा किया जाता है।